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उम्मीदों की शमा दिल में मत जलना, इस जहाँ से अलग दुनिया मत बसना, आज बस मूड में था तो समस कर दिया, पर रोज इंतज़ार में पलके मत बिछाना
गीता में लिखा है?
अरे यार यहाँ क्या धुंद रहा है, मैंने कहा गीता में लिखा है!!
कितना भी चाहो न भोल पाओगे कितना भी चाहो न भोल पाओगे हम से जितना दूर जाओ नजदीक पो गे हमें मिटा सकते हो तो मिटा दो यादें मेरी, मगर.. क्या सपनो से जुदा कर पो गे हमें।